Monday, 29 June 2015

रिमझिम रिमझिम बरसती यह ठण्डी फुहार रुलाती है

रिमझिम रिमझिम बरसती यह ठण्डी फुहार रुलाती  है
घनघोर घटा   संग  दामिनी  नभ  पर  रास  रचाती   है
छुप   गया   चंदा   बदरा   संग   तारों  की  बारात लिये
लगा  कर अगन  शीतल  हवायें  बिरहन  को  सताती है
रेखा जोशी