Wednesday, 3 June 2015

अस्तित्व मानव का शून्य है यहॉं विस्तृत बह्मांड में

आकाश पर असंख्य सूर्य चाँद तारे सब विचर रहें है
अनगिनत पिंड भी आकाशगंगा संग भ्रमर कर रहें है 
अस्तित्व मानव का शून्य है यहॉं विस्तृत बह्मांड में
शीश झुकाएं अपना नमन उस परम पिता को कर रहें है
रेखा जोशी