Friday, 23 October 2015

कम नही किसी जादूगर से कलमकार

एकरस होते जब 
दिल और दिमाग
उतर आते जज़्बात 
कागज़ पर
कम नही
किसी जादूगर से
कलमकार
मचा सकता तहलका
आ सकती क्रान्ति
विश्व में
उसकी कलम से 
उसकी पैनी धार से
जो खामोश करती वार
हम सबके दिलों पर
झकझोड़ कर विचारों को
है दिखा देती
इक नवीन दिशा 
सृजन कर रचना का 
बना सकता एक 
स्वस्थ समाज 
कर सकता निर्माण एक 
सशक्त राष्ट्र का 

रेखा जोशी 




रेखा जोशी