Saturday, 31 October 2015

ज़ख्म हमको इस ज़माने ने दिये अब

हाथ थामें दूर साजन आज जाना 
साथ दे कर प्यार को अब तुम  निभाना
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राह मुश्किल ज़िंदगी की जान लो तुम
छोड़ कर अब तुम हमें मत दूर जाना
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जब कभी भी  राह में आये मुसीबत
थाम लेना तुम हमें अपना बनाना

ख़्वाब जो हम को दिखाये ज़िंदगी ने
तोड़ कर फिर तुम उसे वापिस न जाना

ज़ख्म हमको इस  ज़माने ने दिये अब
ज़िंदगी मेरी गई बन इक फ़साना 

रेखा जोशी