Thursday, 30 October 2014

शक्तिपुंज


शक्तिपुंज
दिवाकर ने
जब खोले नयन
हुआ प्रकाशित
जग सारा
जंगल
हुआ हरा भरा
अरुण की रश्मियों से 
दी दस्तक जब धूप ने
फूल खिले बगिया में
उतरते रहे दिन
धूप की घाटियों में 
बिखरती रही खुशियाँ
सूरज के आगमन से
और जीवन
खेलता मचलता रहा 
धरा के आँचल में

रेखा जोशी