Sunday, 5 October 2014

दौड़ रहां वह

दौड़ रहां वह
इस दुनिया में
अंतहीन दौड़
लेकिन तन्हा
पूरे करने उसे
सपने जो
देखे उसके पिता  ने
खरा उतरना है उसे
उम्मीदों पर अपनी माँ
पत्नी और बच्चों की
लेकिन अपने सपने
दफन है सीने में
उसके
थक कर हांफने लगा
लेकिन
वक्त नही है रुकने का
जीतनी है जंग
उसे ज़िंदगी की
क्योंकि
उसे प्यार है उन सबसे
अपने सपनो से भी
ज्यादा

रेखा जोशी