Monday, 6 April 2015

अब सनम मुश्किलें हम न पायें कभी


राह पे हम चलें हाथ थामे कभी 
गम न कर हम नही साथ छोड़े कभी 
… 
मेल हम सब  रखेंगे यहाँ पर अगर 
अब सनम मुश्किलें हम  न पायें कभी
… 
मान जाओ सजन रूठना अब नही 
जान जाये हमारी न माने कभी 
… 
रात दिन हम जिये सनम यह ज़िंदगी 
ज़िंदगी में  न  हम साथ  छोड़ें कभी 
.... 
चार दिन की जवानी मिले है यहाँ 
क्या पता ज़िंदगी रूठ जाये कभी
....
रेखा जोशी