Thursday, 28 May 2015

सपना सच हो उसका

सुबह सुबह
ठिठुरती सर्दी
कूड़े के ढेर में
वह
बीनता सपने
टुकड़ों में
फलों के रोटी के
नही सोऊँगा खाली पेट
सिर पर होगी छत
कह रहा उससे
वह जो
मांगता वोट
दे दूँगा जीते हारे
वह बला से
सपना
सच हो उसका

रेखा जोशी