Wednesday, 6 May 2015

साज पर इक प्यार की धुन भी मचलनी चाहिए


 रात काली यह सुबह में आज ढलनी चाहिए 
ज़िंदगी की शाम भी साजन सँभलनी चाहिए
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राह में मिलते बहुत से लोग अपनी ही कहें
सोच अपनी भी यहाँ अब तो बदलनी चाहिए

इस जहाँ में प्यार की कीमत को'ई समझे नहीं
साज पर इक प्यार की धुन भी मचलनी चाहिए
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बाँह मेरी थाम साजन ले चलो अब उस जहां,
चाह इक दूजे की ' भी तो आज फलनी चाहिए

जोश भर कर ज़िंदगी का अब मज़ा ले लो सजन
साथ लहरें भी नदी की अब उछलनी चाहिए

रेखा जोशी