Sunday, 16 November 2014

छलकाते जाते प्रेम रस



अक्सर 
खाते है चोट 
प्रेम पथ पर चलने वाले 
पकड़ विश्वास की डोर
बंद कर नयन अपने 
सादगी से 
हो जाते समर्पित 
प्रेम में अपने 
जीवन भर के लिये 
दीवानी मीरा जैसे 
पागल प्रेम में
हँसते हँसते 
पी जाते ज़हर भी 
अक्सर 
आस्था का दीपक लिये 
हाथों में 
खा कर गहरी चोट भी 
नही रुकते बाँवरे 
उजियारा करने की चाह में 
बढ़ते जाते प्रेम पथ पर 
और 
छलकाते जाते प्रेम रस 
उन्ही 
प्रेम की राहों में 

रेखा जोशी